वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को अर्थव्यवस्था की गंभीर हालत पर चिंता करनी ही पड़ी। उन्होंने उद्योगपतियों से बात की। बैंकरों व अर्थशास्त्रियों की भी राय ली। बताया जा रहा है कि उन्होंने अर्थव्यवस्था में जान फूंकने का पूरा रोडमैप तैयार कर लिया है, विस्तृत कार्यक्रम तैयार है। लेकिन सवाल उठता है कि इतनी ही समझदारी थी तो जुलाई में पेश किए गए इस साल के बजट में सार्थक उपाय क्यों नहीं किए गए? अब बुधवार की बुद्धि…औरऔर भी