सब्ज़बाग को सब्ज़बाग कहना निराशावाद नहीं होता। पर प्रधानमंत्री मोदी 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था को सब्ज़बाग कहनेवालों को पेशेवर निराशावादी बता रहे हैं। मसला यह है कि यह लक्ष्य मोदी सरकार के नए कार्यकाल के आखिरी साल 2023-24 का नहीं, बल्कि उसके एक साल बाद का है। इसलिए लक्ष्य अधूरा रहा तो कह सकते हैं कि अभी तो एक साल बाकी है। दूसरे, 8% की विकास दर से इसकी गिनती गलत है। अब मंगल की दृष्टि..औरऔर भी

हमारी अर्थव्यवस्था इस साल 12% बढ़ी और 4% महंगाई घटा दें तो जीडीपी की वास्तविक विकास दर 8% रहेगी। अगले पांच साल भी इसी दर से जीडीपी बढ़ा तो वित्त वर्ष 2024-25 तक हमारी अर्थव्यवस्था 2.7 ट्रिलियन डॉलर के वर्तमान स्तर से बढ़कर 5 ट्रिलियन डॉलर की हो जाएगी। लेकिन एक्सेल शीट की गणना के मुताबिक 8% की दर से तब तक अर्थव्यवस्था 4.28 ट्रिलियन डॉलर ही होगी। बजट का लक्ष्य राम भरोसे। अब सोम का व्योम…औरऔर भी

बहुत छोटी कंपनियां शेयर बाज़ार में अक्सर बहुत बड़ा कमाल कर देती हैं। हमने करीब पांच साल पहले 10 अगस्त 2014 इसी कॉलम में केवल बीएसई में लिस्टेड कंपनी मॉरगैनाइट क्रुसिबल को चुना था। पिछले चार सालों में कंपनी का शुद्ध लाभ ढाई गुना बढ़ा है, जबकि इसी दौरान उसका शेयर छह गुना (385 से 2330) तक उठने के बाद अब भी साढ़े तीन गुना (1365) ऊपर है। आज भी तथास्तु में पेश है एक माइक्रोकैप कंपनी…औरऔर भी

अर्थव्यवस्था से लेकर शेयर बाज़ार तक के लिए साल का सबसे महत्वपूर्ण दिन। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण लोकसभा में 11 बजे बजट भाषण पेश करेंगी। जीएसटी लागू होने के बाद कर-प्रस्तावों का बहुत महत्व नहीं रह गया है। इसलिए सबकी निगाहें इस बात पर होंगी कि वे अर्थव्यवस्था को गति देने के लिए क्या कदम उठाने जा रही हैं। बाज़ार यह देखेगा कि वे एनबीएफसी के तरलता संकट को कैसे दूर करती हैं। अब शुक्र का अभ्यास…औरऔर भी