भारतीय शेयर बाज़ार में धन के इधर-उधर फंस जाने की मुश्किल आ सकती है। जैसे आईएल एंड एफएस प्रकरण के बाद एनबीएफसी को लिक्विडिटी का संकट झेलना पड़ रहा है। लेकिन अपने यहां धन के अभाव का संकट कभी नहीं आ सकता। भारत में दुनिया के तीसरे सबसे ज्यादा डॉलर अरबपति हैं। अमेरिका व चीन के बाद भारत का ही नंबर आता है। ऊपर से नेताओं व अफसरों की अरबों-खरबों की अघोषित संपत्ति। अब सोमवार का व्योम…औरऔर भी

शेयर बाज़ार कोई मां या मौसी नहीं कि आपकी परवाह करे। उसे नहीं लगता कि आप इतने खास हैं कि आपको औरों से ज्यादा मिलना चाहिए। आप अगर नाकाम होते हैं तो शेयर बाज़ार आपको बचाने या ढाढस बंधाने नहीं आता। मगर हम यह हकीकत स्वीकार करने से भागते हैं। धन गंवाने का दोष दूसरों पर मढ़ते हैं। ध्यान रखें कि यहां अपने किए की सारी ज़िम्मेदारी खुद उठानी पड़ती है। अब तथास्तु में आज की कंपनी…औरऔर भी

भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए बजट कितना कारगर होगा, यह कम से कम एक साल बाद पता चलेगा। लेकिन शेयर बाज़ार के लिए तो वह हफ्ते भर में ही इतिहास बन चुका है। ट्रेडर और निवेशक अब बजट के प्रस्तावों से बाहर निकलकर अन्य मसलों पर गौर करने लगे हैं। जैसे, कंपनियों के तिमाही नतीजे, दुनिया में चल रहे व्यापार युद्ध, मध्य-पूर्व में बढ़ता तनाव और अलग-अलग उद्योगों की स्थिति क्या चल रही है। अब शुक्र का अभ्यास…औरऔर भी

साल 2022 में जब देश आज़ादी की 75वीं वर्षगांठ मना रहा होगा, तब तक किसानों की आय ही नहीं, कृषि निर्यात तक दोगुना कर दिया जाएगा। लेकिन कैसे? सीतारमण भजते रहो! वे चाहतीं तो देश में 560 लाख करोड़ रुपए की संपदा रखने वाले अरबपतियों पर 1% वेल्थ टैक्स लगाकर 5.6 लाख करोड़ और उत्तराधिकार टैक्स से 9.3 लाख करोड़ जुटा सकती थीं। लेकिन उन्होंने अमीरों पर सरचार्ज से जुटाए केवल 2724 करोड़! अब गुरु की दशा-दिशा…औरऔर भी

बजट में भारतीय अर्थव्यवस्था के विकास का सारा भार देशी नहीं, विदेशी पूंजी पर डाल दिया गया है। शेयर बाज़ार में पूंजी लगानेवाले विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों के लिए केवाईसी नियम आसान कर दिए गए हैं। मेक-इन इंडिया भले ही पिछले पांच सालों में सफल न हुआ था, लेकिन विदेशी पूंजी को मैन्यूफैक्चरिंग में खींचने का दावा है। ऊपर से भारत सरकार खुद पहली बार संप्रभु बांड से विदेशी ऋण जुटाने जा रही है। अब बुधवार की बुद्धि…औरऔर भी