आमतौर पर शेयर बाज़ार धीरे-धीरे ऊपर उठता है। बढ़त के दौरान उतना ज्यादा उतार-चढ़ाव नहीं होता। लेकिन गिरते वक्त उसकी रफ्तार कहीं ज्यादा होती है। अध्ययन बताते हैं कि बाज़ार जिस गति से बढ़ता है, उसकी तीन गुना गति से गिरता है। इसके दो मुख्य कारण हैं। पहला, डर की भावना लालच की बनिस्बत कहीं ज्यादा ताकतवर होती है। दूसरा कारण यह कि बाज़ार में खरीदने की तुलना में बेचना आसान होता है। अब मंगल की दृष्टि…औरऔर भी

शेयर बाज़ार और अलग-अलग शेयरों के भाव लहरों में चलते हैं। फिर, इन लहरों की तीन चाल होती है। ऊपर, नीचे या सीमित दायरे में भटकती कमोबेश सीधी रेखा। ट्रेडिंग में बाज़ार की इसी स्वभाव से कमाया जाता है। लहर के निचले स्तर पर खरीदना, ऊपरी स्तर पर बेचना। शॉर्ट-सेलिंग में इसका उल्टा। समय का कोई भी फ्रेम चुने, एक दिन, कई दिन, सप्ताह या महीने। ट्रेडिंग से कमाने का यही सलीका है। अब सोमवार का व्योम…औरऔर भी

शेयर बाज़ार में अच्छी कंपनियों की कमी नहीं है। आम तौर पर नाम व काम के दम पर उनके शेयर काफी महंगे होते हैं। लेकिन कभी-कभी खराब आर्थिक हालात या कंपनी के कामकाज में तात्कालिक समस्याओं से उपजी निराशा के चलते उनके शेयर गिरकर ज़मीन पर आ जाते हैं। ऐसे वक्त में इन कंपनियों के शेयर खरीद लेने में समझदारी हैं क्योंकि उनका दीर्घकालिक भविष्य मजबूत बना रहता है। आज तथास्तु में ऐसे ही एक ब्लूचिप कंपनी…औरऔर भी

शेयर बाजार की बुनियादी संरचना ही ऐसी है कि वह हमेशा लंबे समय में ऊपर जाता है। खासकर भारत जैसे संभावनाओं से भरे विकासशील देश के लिए तो यह अमिट सच्चाई है। सबको डर है कि अगर मोदी सरकार मई में लोकसभी चुनाव जीतकर दोबारा नहीं लौटी तो शेयर बाज़ार पटरा हो जाएगा। हो सकता है कि ऐसा होने पर बाज़ार को हफ्ते-दस दिन का झटका लगे, लेकिन वह फिर कुलांचे मारने लगेगा। अब शुक्रवार अभ्यास…और भीऔर भी

बाज़ार का स्वभाव बड़ा विचित्र है। जब तमाम मूलभूत कारक बता रहे होते हैं कि कोई स्टॉक या पूरा शेयर बाजार उठने जा रहा है, तभी वह अचानक डूब जाता है। यहां हर गणना फेल है। बाज़ार का यह मनमानापन समझने के लिए हर ट्रेडर को नासिम निकोलस तालेब की किताब ‘ब्लैक स्वान’ ज़रूर पड़नी चाहिए। तालेब ने वित्तीय बाज़ार में ट्रेडिंग के दशकों के गहरे अनुभव को निचोड़कर यह किताब लिखी है। अब गुरुवार की दशा-दिशा…और भीऔर भी