दिसंबर में जब से अमेरिका के केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व ने ब्याज दर बढ़ाकर 2.25 से 2.50% की है, तभी से विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक भारत से निकलने लगे हैं। अकेले जनवरी महीने में उन्होंने भारतीय शेयर बाज़ार से 4262 करोड़ रुपए निकाले हैं। फरवरी में अभी तक उन्होंने शुद्ध खरीद की है। फिर भी कुल मिलाकर इस साल उनका खाता ऋणात्मक चल रहा है। उन्होंने इस दौरान बांडों से भी धन निकाला है। अब गुरु की दशा-दिशा…औरऔर भी

पिछले हफ्ते सिंगापुर में एशिया में निवेश के अवसरों पर एक सम्मेलन हुआ। हालांकि यह वर्चुअल या ऑनलाइन सम्मेलन ही था। लेकिन इसमें दुनिया के मशहूर फंड मैनेजर जिम रोजर्स से लेकर कई निवेश व ट्रेडिंग संबंधी रिसर्च फर्मों से भाग लिया। यह जानकर काफी अचंभा हुआ कि उन्होंने साल 2019 में एशिया में निवेश के मौकों का जिक्र करते हुए चीन ही नहीं, बांग्लादेश तक का नाम लिया। पर भारत का नहीं। अब बुध की बुद्धि…औरऔर भी

इस साल दुनिया के बाज़ारों से भारतीय बाज़ार के विपरीत दिशा में चलने की एक बड़ी वजह यह है कि हमारा बाज़ार पहले से ही काफी महंगा था तो निवेशक इसमें नई खरीद से बच रहे हैं। निफ्टी पहली जनवरी को 26.28 के पी/ई अनुपात पर ट्रेड हो रहा था। उसके बाद गिरा है। फिर भी 25 फरवरी को उसका पी/ई अऩुपात 26.53 रहा है क्योंकि कंपनियों के तिमाही नतीजे खराब रहे हैं। अब मंगलवार की दृष्टि…औरऔर भी

इस समय भारतीय शेयर बाज़ार का हाल बड़ा विचित्र चल रहा है। आम तौर पर वह दुनिया के बड़े शेयर बाज़ारों के साथ ताल मिलाकर चलता रहा है। लेकिन फिलहाल उसकी चाल सबसे न्यारी है। इस साल अभी तक अमेरिका का डाउ जोन्स सूचकांक 11%, जापान का निक्केई 9%, चीन का शांघाई सूचकांक 12% और लंदन का फुटसी सूचकांक 7% बढ़ा है, जबकि अपना सेंसेक्स 3% गिरा है। आखिर यह उलट चाल क्यों? अब सोम का व्योम…औरऔर भी

कुछ कंपनियां निवेशकों की दुश्मन होती हैं। ताम-झाम दिखाकर या ऑपरेटरों का जाल फैलाकर निवेशकों से धन झटकती हैं। फिर प्रवर्तक तो मौज करते हैं, जबकि कंपनियां सारा मूल्य चट कर जाती हैं। हमारे पुराने पाठक सीएनआई रिसर्च की सुझाई सूर्यचक्र पावर को लेकर ज़रूर ऐसे सदमे में होंगे। लेकिन कुछ कंपनियां अपने शेयरधारकों का मूल्य हमेशा बढ़ाती रहती हैं। उनका प्रबंधन कभी निवेशकों को गच्चा नहीं देता। आज तथास्तु में कुशल प्रबंधनवाली ऐसी ही एक कंपनी…औरऔर भी