ब्रोकर खूब खेलें पावर ऑफ एटॉर्नी से
ब्रोकर आम निवेशकों को कैसे ठगते हैं, इसके किस्से मुंबई ही नहीं, जयपुर व इंदौर से लेकर लुधियाना, बनारस, कानपुर, मेरठ व रांची तक बिखरे हुए मिल जाएंगे। यह खेल ब्रोकरों से जुड़ी फ्रैंचाइजी जमकर करती हैं। जिस ब्रोकर का दायरा जहां तक फैला है, वह वहां तक निवेशकों के साथ फ्रॉड करता है। वो निवेशकों से ली गई पावर ऑफ एटॉर्नी का फायदा उठाते हैं। कमीशन के लिए जमकर सौदे करते हैं। अब बुधवार की बुद्धि…औरऔर भी
रिसर्च के नाम पर निवेशकों को चरका
अर्थकाम ने अपनी शुरुआत ही बीएसई में लिस्टेड एक इक्विटी रिसर्च कंपनी के साथ गठजोड़ से की थी ताकि पाठकों को शेयर बाज़ार की रिसर्च आधारित सूचनाएं दी जा सकें। हम पूरी शिद्दत से उससे मिली सूचनाएं और सिफारिशों को पेश करते रहे। लेकिन दो साल बीतने से पहले ही साफ हो गया कि उक्त कंपनी कहीं से भी निष्पक्ष नहीं है और ऑपरेटरों के साथ मिलकर रिटेल निवेशकों को चरका पढ़ाती है। अब मंगल की दृष्टि…और भीऔर भी
भारतीय बाज़ार में है ठगों की भरमार
वित्तीय बाज़ार के दूसरे क्षेत्रों की बात मैं नहीं जानता। पर दस साल के अपने अनुभव से भलीभांति जान गया हूं कि अपने शेयर बाज़ार में हर तरफ ठगों की भरमार है। ब्रोकरेज़ फर्मों से लेकर रिसर्च कंपनियां तक रिटेल निवेशकों को झांसा देने का काम करती हैं। करोड़ों की पूंजीवाले ग्राहकों से इनसे रिश्ते अलग रहते होंगे। लेकिन 20-25 लाख तक की पूंजीवाले सामान्य निवेशकों को चरका पढ़ाना इनके डीएनए में है। अब सोम का व्योम…औरऔर भी
विकास के छल्ले लांघतीं कंपनियां
बचपन, जवानी, बुढ़ापा और मौत। जीवन के इस चक्र में इंसान सबसे ज्यादा मूल्यवान अपनी जवानी में होता है। तमाम कंपनियां भी ऐसे ही चक्र से गुजरती हैं। लेकिन कुछ कंपनियां वक्त की नब्ज़ और ज़रूरत से ऐसी जुड़ती हैं कि बहुत लंबा जीवन जीती हैं। सालों-साल बाद भी वे एकदम जवान रहती हैं। ऐसी कंपनियों को अगर हम वक्त रहते पकड़ लें तो हमारी बचत को पंख लग जाते हैं। अब तथास्तु में आज की कंपनी…औरऔर भी





