अगस्त अंत से चालू अक्टूबर महीने के पहले हफ्ते तक बीएसई में लिस्टेड 2733 कंपनियों में से 688 कंपनियों के शेयर 52 हफ्ते के शीर्ष से 61% से ज्यादा, 495 के शेयर 51-60%, 485 के 41-50%, 440 के 31-40%, 342 के 21-30% और 171 के शेयर 11-20% गिर चुके हैं। इनमें से कुछ को खराब आर्थिक स्थिति तो बहुतों को बाज़ार के मौजूदा सेटिमेंट ने मारा है। आज तथास्तु में इनमें से निवेश के दो अच्छे अवसर…औरऔर भी

बाज़ार ऐसे कारणों से गिरता जा रहा है जो हमारे हाथ से बाहर हैं। जिस साढ़े-साती का जिक्र हमने किया, उसकी साढ़े सात अनिश्चितताएं रातों-रात नहीं खत्म होने जा रहीं। बाज़ार का गिरना कतई थम नहीं रहा। एक दिन पटरी पर आता दिखा बाज़ार अगले ही दिन पटरी से उतर जाता है। उसे रोकना हमारे वश में नहीं। लेकिन कुछ चीजें हमारे वश हैं जिन पर ज्यादा ध्यान देकर हम कमा सकते हैं। अब शुक्रवार का अभ्यास…औरऔर भी

जून तिमाही में जीडीपी 8.2% बढ़ गया। कंपनियों के नतीजे भी बेहतर आने लगे। पर देशी व विदेशी संस्थाओं की खींचतान, एलआईसी पर बढ़े बोझ, आईएल एंड एफएस के संकट, राजनीतिक दुविधा, कमज़ोर रुपए, महंगे कच्चे तेल और बढ़ती ब्याज दरों ने सब पटरा कर दिया। बाज़ार गिर गया। फिर भी सेंसेक्स 22.33 और निफ्टी 25.30 के पी/ई अनुपात पर ट्रेड हो रहा है तो गिरने के बाद भी अभी महंगा है बाज़ार। अब गुरु की दशा-दिशा…औरऔर भी

ग्लोबल बनी दुनिया का दुष्प्रभाव है कि अमेरिका और चीन के व्यापार-युद्ध का प्रभाव भारत समेत सभी देशों पर पड़ता है। यह हमारे शेयर बाज़ार पर लगी साढ़े-साती का एक प्रमुख तत्व है। इस साल मार्च से ट्रम्प ने इसका बिगुल बजाया और अब दोनों देश एक दूसरे के उत्पादों पर शुल्क बढ़ाने में लगे हुए हैं। अमेरिका दुनिया का सबसे बड़ा आयातक है तो उसका शुल्क बढ़ाना ज्यादा ही मारक होता है। अब बुधवार की बुद्धि…औरऔर भी