बाज़ार ऐसे कारणों से गिरता जा रहा है जो हमारे हाथ से बाहर हैं। जिस साढ़े-साती का जिक्र हमने किया, उसकी साढ़े सात अनिश्चितताएं रातों-रात नहीं खत्म होने जा रहीं। बाज़ार का गिरना कतई थम नहीं रहा। एक दिन पटरी पर आता दिखा बाज़ार अगले ही दिन पटरी से उतर जाता है। उसे रोकना हमारे वश में नहीं। लेकिन कुछ चीजें हमारे वश हैं जिन पर ज्यादा ध्यान देकर हम कमा सकते हैं। अब शुक्रवार का अभ्यास…औरऔर भी