हम कभी-कभी फंडामेंटल और टेक्निकल एनालिसिस को मिला देते हैं। सोचते हैं कि कंपनी का फंडामेंटल सॉलिड है, तो उसका शेयर पक्का बढ़ेगा। लेकिन इस बढ़त में महीनों नहीं, सालों लग सकते हैं, जबकि ट्रेडिंग का सौदा कुछ दिनों या एकाध महीने का होता है। बाज़ार बंद होने के दिन शनिवार को आए शानदार नतीजों के बावजूद सोमवार को कंपनी का शेयर गिर जाता है क्योंकि उसमें मांग सप्लाई से कम होती है। अब शुक्र का अभ्यास…औरऔर भी