अपनी ही मान्यताओं को दृष्टा भाव से देखने पर धीरे-धीरे हमारे अंदर ‘जो जैसा है, उसे वैसा ही’ देखने की दृष्टि विकसित होने लगती है। यही वह मुकाम है जहां पहुंचते ही आपको ट्रेडिंग के नियम लिखकर रख लेने चाहिए, चाहे वह स्टॉक के चयन से जुड़ा हो, स्टॉप-लॉस या पोजिशन साइज़िंग से जुड़ा हो या टेक्निकल एनालिसिस के कुछ सकेतकों का पालन करना हो। मान्यताओं को सिर उठाते ही नियमों पर कसें। अब बुधवार की बुद्धि…औरऔर भी

आखिर मन में जमी मान्यताओं को कैसे काटा जाए? दरअसल, वे कंप्यूटर ग्लिच की तरह हैं। वे कंप्यूटर कोड की तरह हमारे ट्रेड ही नहीं, जीवन तक को प्रभावित करती हैं। इसलिए उन्हें हमें निष्क्रिय करना पड़ेगा, अन-इंस्टॉल करना पड़ेगा। इस काम की शुरुआत तभी हो सकती है जब हम शांत मन से उन मान्यताओं को देखना शुरू कर दें। जैसे ही उनका शिकंजा कसे, हम उन्हें दृष्टा भाव से देखने लग जाएं। अब मंगल की दृष्टि…औरऔर भी

घर-परिवार व समाज से मिली मान्यताएं ट्रेडरों की सोच से लेकर कर्म तक को बांध देती हैं। वे न मुक्त रूप से विश्लेषण कर पाते हैं और न ही सही तस्वीर देख पाते हैं। खुद को नुकसान पहुंचाने के कदम उठाते हैं। वे इससे निकलने के लिए किताबें बढ़ते हैं, अभ्यास करते है, खुद से बार-बार वादा करते हैं कि आगे से गलती नहीं करेंगे। लेकिन पुरानी मान्यताएं उन्हें पटकती रहती है। अब सोम का व्योम…और भीऔर भी

आशा, उम्मीद और नोटों के प्रवाह के दम पर फूला शेयर बाज़ार जब गिरता है तो सबसे पहली मार स्मॉल-कैप और मिडकैप स्टॉक्स पर पड़ती है। हालांकि इसकी चपेट से बड़े-बड़े दिग्गज भी नहीं बच पाते। शायद आपको याद नहीं होगा कि पिछली चपेट में दिसंबर 2007 से मार्च 2009 तक के दौरान कोटक महिंद्रा बैंक 82.1%, लार्सन एंड टुब्रो 70.5%, एचडीएफसी 57.9, मारुति 54.2% और टाइटन 52.4% लुढ़क गया था। अब तथास्तु में आज की कंपनी…और भीऔर भी