गलत को सही करने की क्या है राह!
बहुत आसान है यह कहना कि बाज़ार में प्रोफेशनल ट्रेडर सही वक्त पर एंट्री करते और सही वक्त पर निकलते हैं, जबकि नौसिखिया/रिटेल ट्रेडर गलत वक्त पर एंट्री और गलत वक्त पर बाहर निकलते हैं। अहम सवाल यह है कि इस गलत को सही करने का रास्ता क्या है? बहुत-से लोगों को लगता है कि कुछ किताबें पढ़ ली जाएं, ट्रेडिंग पर कुछ ऑन-लाइन वीडियो देख लिए जाएं तो सही रास्ता मिल जाएगा। अब सोमवार का व्योम…औरऔर भी
बैंकों की एफडी भी सुरक्षित नहीं
हम बैंक एफडी को सुरक्षित मानते हैं। लेकिन हकीकत यह है कि इस समय 21 सरकारी बैंकों में 11 के डूबत ऋण उनकी नेटवर्थ का डेढ़ गुना तक हो चुके हैं। उनका घाटा समूचे डिपॉजिट का मूल्य सोख चुका है। उनका शटर गिरा तो आपका 90-100% डिपॉजिट स्वाहा हो सकता है। सरकार उनके घाटे व पूंजी की भरपाई कर रही है, तभी तक वे बचे हैं। तथास्तु में ऐसी कंपनी जिसमें निवेश बैंक-एफडी से ज्यादा सुरक्षित है…औरऔर भी
न जुड़ाव, न दुराव से होगा मन मुक्त
मन को नकारात्मक व नुकसानदेह मान्यताओं या धारणाओं के मुक्त करने के एक नहीं, अनेक तरीके हैं। मूल बात है कि इन्हें हमें अपने अंदर देखना होगा। इन्हें देखना भर है। न इनसे जुड़ाव रखना है, न दुराव। इतना करते ही इनका मिटना शुरू हो जाएगा। एक दिन चेतन और अवचेतन मन के बीच की लौह दीवार टूट जाएगी और मन पूरी ताकत से खिल उठेगा। लेकिन यह काम आपको खुद करना होगा। अब शुक्रवार का अभ्यास…औरऔर भी
ट्रेडिंग में वस्तुपरक नज़रिया धीरे-धीरे
धीरे-धीरे पुरानी मान्यताएं पीछे हटती जाती हैं और उनकी जगह ट्रेडिंग का वस्तुपरक नज़रिया लेने लगता है। हमें कभी-कभी आंखें बंदकर इस नए नज़रिए को आकार लेते महसूस करना चाहिए। पुराने के जाने और नए के आने को अनुभूति पर कसना चाहिए। इस तरह हम अपने अवचेतन मन को ट्रेन करते जाते हैं। याद रखें कि अवचेतन मन हमारी 95% क्रियाओं व सोच को कंट्रोल करता है, जबकि चेतन मन मात्र 5% को। अब गुरु की दशा-दिशा…औरऔर भी







