नियम बनाते हैं, मन मानने नहीं देता
अक्सर हम ट्रेडिंग के नियम व अनुशासन तो बना लेते हैं। लेकिन उनका पालन नहीं करते क्योंकि हमारी मान्यताएं उसके आड़े आ जाती हैं। नियम कुछ कहता है, जबकि हमारे मन में बैठी धारणाएं हमें कहीं और खींचकर ले जाती हैं। इस आंतरिक खींचतान को निपटाने में वक्त लगता है। तब तक हमें बाज़ार में सौदे करने के बजाय मन को वस्तुगत सूचनाओं और सच आधारित चिंतन को स्वीकार करना सिखाना पड़ता है। अब मंगल की दृष्टि…औरऔर भी






