अक्सर हम ट्रेडिंग के नियम व अनुशासन तो बना लेते हैं। लेकिन उनका पालन नहीं करते क्योंकि हमारी मान्यताएं उसके आड़े आ जाती हैं। नियम कुछ कहता है, जबकि हमारे मन में बैठी धारणाएं हमें कहीं और खींचकर ले जाती हैं। इस आंतरिक खींचतान को निपटाने में वक्त लगता है। तब तक हमें बाज़ार में सौदे करने के बजाय मन को वस्तुगत सूचनाओं और सच आधारित चिंतन को स्वीकार करना सिखाना पड़ता है। अब मंगल की दृष्टि…औरऔर भी

पिसान अवधी का शब्द है जिसका अर्थ है आटा। वाकई, हमारी केंद्र सरकार ने दाल पर ऐसा रवैया अपना रखा है जिससे किसानों का पिसान निकल गया है। इससे यही लगता है कि या तो वह घनघोर किसान विरोधी है या खेती-किसानों के मामले में उसके कर्ताधर्ता भयंकर मूर्ख है। वैसे, शहरी लोग बड़े खुश हैं कि अरहर या तुअर की जो दाल साल भर पहले 180-200 रुपए किलो बिक रही थी, वह अब 60-70 रुपए किलोऔरऔर भी

जिस पल हमें अहसास हो जाता है कि मन में बैठी मान्यताएं व धारणाएं शेयर बाज़ार में हमारी निवेश या ट्रेडिंग की रणनीति तय कर रही हैं, उसी पल हम उनको लेकर सतर्क हो जाते हैं और उन्हें बाज़ार की वास्तविकता के माफिक ढालने लगते हैं। अगर आपको वाकई सच की तलाश है तो अपने भ्रमों के प्रति आपका सचेत रहना ज़रूरी है। भ्रम के शिकार रहे तो ट्रेडिंग में कामयाबी नहीं मिलेगी। अब सोमवार का व्योम…औरऔर भी

अगर आपको लंबे समय का कामयाब निवेशक बनना है तो पहले कुशल जासूस बनना होगा। हर कंपनी एक अलग तरह का रहस्य है जिसे आपको सुलझाना है। आपको सही सवाल पूछने की कला विकसित करनी होगी। अपने दिमाग को इस तरह प्रशिक्षित करना होगा कि वह कंपनियों के बीच उभर रहे पैटर्न को खटाक से पकड़ सके। करना आपको ही होगा। बाहर से तो केवल मदद ही मिल सकती है। अब तथास्तु में एक और संभावनामय कंपनी…औरऔर भी

मन है तो मान्यताएं रहेंगी। लेकिन शेयर बाज़ार से बराबर कमाने के लिए हमें उन्हें वास्तविकता के माफिक ट्यून करना होता है। कोई शेयर तभी बढ़ता है जब उसका भाव ऐसे स्तर पर होता है जहां सप्लाई की तुलना में मांग काफी ज्यादा हो। हालांकि आम मान्यता यह है कि हम चढ़े हुए शेयरों को ज्यादा चढ़ने की उम्मीद में खरीदते हैं, जबकि प्रोफेशनल ट्रेडर उस वक्त मुनाफावसूली की फिराक मे रहते हैं। अब शुक्रवार का अभ्यास…औरऔर भी