अक्सर जटिल समस्याओं का समाधान बड़ा सरल होता है। वित्तीय बाज़ार की ट्रेडिंग भी इसका अपवाद नहीं है। हर व्यापार में धंधे का सूत्र है थोक में खरीदकर रिटेल में बेचना। यही मूलमंत्र है शेयर बाज़ार की ट्रेडिंग से कमाने का। साथ ही भाव डिमांड और सप्लाई के संतुलन से निर्धारित होते हैं तो इसका भी ध्यान रखना चाहिए। तीसरी बात, डिमांड और सप्लाई का स्तर संस्थाएं तय करती हैं, रिटेल ट्रेडर नहीं। अब शुक्रवार का अभ्यास…औरऔर भी

सिस्टम बनाने के लिए मूल आधार बाज़ार व शेयर का पिछला रिकॉर्ड है। टेक्निकल एनालिसिस जैसे तमाम सिद्धांत इसमें पैठने के लिए निकाले गए हैं। दिक्कत यह है कि जैसे ही कोई सिद्धांत या तरीका आम बनता है तो ट्रेडर की धार कुंद हो जाती है क्योंकि सभी वैसा ही कर रहे होते हैं। मसलन, कल की कामयाब क्वांट रणनीति अब नाकाम हो चुकी है। इसलिए हमें अपनी रणनीति बराबर संवारनी पड़ती है। अब गुरुवार की दशा-दिशा…औरऔर भी

वित्तीय बाज़ार की ट्रेडिंग में अतीत की सीख और वर्तमान की समझ के आधार पर हम भविष्य का सौदा करते हैं। भविष्य कोई नहीं जानता। इसलिए हम अधिकतम यही कर सकते हैं कि न्यूनतम रिस्क में सही बैठने की अधिकतम प्रायिकता वाले सौदे चुनें और अपनी ट्रेडिंग पूंजी बचाकर चलें। इस सोच के साथ सिस्टम ऐसा बनाएं कि  हम उन्नीस पर बीस नहीं तो कम से कम 19.05 तो साबित ही हो जाएं। अब बुधवार की बुद्धि…औरऔर भी

ट्रेडिंग के लिए सौदे चुनने में दूसरा मदद ही कर सकता है। वह आपके चयन का दायरा बढ़ा सकता है। हर दिन ट्रेड होनेवाली 1500 से ज्यादा कंपनियों में से दो-चार चुनकर आपके लिए पेश कर सकता है। वो घुसने, निकलने और स्टॉप-लॉस की गणना भी कर सकता है। लेकिन उसका चयन आपके सिस्टम पर कितना खरा उतरता है और ट्रेड में घुसने, निकलने व स्टॉप-लॉस का सटीक स्तर आपको ही निकालना चाहिए। अब मंगलवार की दृष्टि…औरऔर भी

वैसे तो स्वर्ग या नरक किसी दूसरे लोक नहीं, बल्कि इसी धरती पर होते हैं। लेकिन कहावत है कि बिना खुद मरे स्वर्ग नहीं मिलता। इसी तरह शेयर बाज़ार में ट्रेडिंग से कमाई तब तक नहीं होती, जब तक आप अपना खुद का सिस्टम नहीं विकसित करते। हर किसी का रिस्क प्रोफाइल अलग है और उसे उसी हिसाब से सौदे करने होते हैं। सिद्धांत व व्यवहार का फासला उसे ही पाटना होता है। अब सोम का व्योम…औरऔर भी