पड़ता है मन व भावनाओं को साधना
गीता में मन को मनुष्यों के बंधन और मुक्ति का कारण बताया गया है। बुद्ध भी मानते थे कि मानव-मन में जो सहज भावनाएं उठती हैं, वे अक्सर छलिया होती हैं। इसलिए मन व भावनाओं को साधना जीवन में सफलता के लिए आवश्यक है। ट्रेडिंग भी इसका अपवाद नहीं। हमारे अवचेतन में भरा है कि सब डरें तो डरो और चहकें तो चहको। लेकिन यह सोच निवेश व ट्रेडिंग के लिए आत्मघाती है। अब मंगलवार की दृष्टि…औरऔर भी
सारी सीख पर पानी फेर दे हमारा मन
कौन नहीं जानता कि सामान्य व्यापार से लेकर वित्तीय बाज़ार में ट्रेडिंग से कमाने का मुख्य आधार है थोक भाव पर खरीदना और रिटेल भाव पर बेचना। ट्रेडिंग के तर्क, नियम और रणनीति को सीखना-समझना कोई रॉकेट साइंस नहीं है। लेकिन असली चुनौती तब शुरू होती है जब हम उन्हें व्यवहार में अपनाना शुरू करते हैं। तब सबसे बड़ी बाधा बनकर खड़ा हो जाता है हमारा मन, उसमें उठ रहे भाव व भावनाएं। अब सोमवार का व्योम…औरऔर भी
हड़बड़ी नहीं, बेहतर होगा इंतज़ार
पच्चीस साल पहले शेयर बाज़ार में ऐसी ही गहमागहमी थी। हर तरफ हर्षद मेहता का जलवा था। कहते थे कि जिसे वो हाथ लगाए, सोना बन जाए। लेकिन जब वो हीरो से ज़ीरो बना तो लाखों निवेशकों व ट्रेडरों की बचत स्वाहा हो गई। सबक यह कि चढ़े हुए बाज़ार के पीछे भागना ठीक नहीं। निवेश तभी करें, जब भाव वाजिब स्तर पर आ जाए। तथास्तु में एक अच्छी कंपनी जिसमें निवेश के लिए इंतज़ार करना होगा…औरऔर भी
धन का समय-मूल्य ही है मूल धारणा
वित्तीय साक्षरता का मूलाधार है धन का समय-मूल्य। जब तक समाज में महंगाई का वजूद है, जिससे मुद्रास्फीति और ब्याज़ दरों का सीधा रिश्ता है, तब तक हमें गांठ बांध लेनी होगी कि साल भर बाद का सौ रुपए आज के सौ रुपए से कमतर होगा। पांच साल में अगर हमारी आय 10,000 से 20,000 हो गई और मुद्रास्फीति सालाना 10% रही है तो हमारी आय हकीकत में मात्र 4105 रुपए बढ़ी है। अब शुक्रवार का अभ्यास…औरऔर भी






