ज़मीन पर चलनेवाले को फिसलने का डर रहता है, खाईं में गिरने का डर नहीं रहता। लेकिन चोटी पर चढ़ा हुआ शख्स ज़रा-सा फिसला तो गहरी घाटी में गिर सकता है। साल 2008 में ऐसा हो चुका है। तब भी बहुत सारे आईपीओ आ रहे थे। बाज़ार के नए आसमान पर चढ़ने की बात की जा रही थी। लेकिन अचानक गिरा तो वह खजूर पर नहीं अटका, बल्कि सीधे रसातल जा पहुंचा। अब आजमाएं मंगलवार की दृष्टि…औरऔर भी

शेयर बाज़ार में उन्माद-सा छाया हुआ है। जबरदस्त आशावाद। कोई कहता है, निफ्टी अगले एक-डेढ़ साल में 2000 अंक बढ़ जाएगा और तीन साल में 13,000 तक पहुंच सकता है। इसी तरह साल भर के भीतर सेंसेक्स के 54,000 तक उठने की बात की जा रही है। ऐसे में निवेशकों ही नहीं, बहती धारा के साथ बहनेवाले ट्रेडरों को भी बेहद सावधान रहने की ज़रूरत है। वरना, अचानक डूब गए तो! अब परखते हैं सोमवार का व्योम…औरऔर भी

पिछले कुछ हफ्तों से शेयर बाज़ार में विदेशी संस्थाएं बराबर बेच रही हैं, जबकि हमारे म्यूचुअल फंड बराबर खरीदे जा रहे हैं। कारण, आम निवेशक इनमें धन लगा रहे हैं तो खरीदना उनकी मजबूरी है। यह बराबर होता है कि जब बाज़ार शिखर पर होता है तभी रिटेल निवेशक उस ओर दौड़ते हैं। महंगा निवेश अंततः उन्हें मार लगाता है। मगर इंसानी लालच का किया क्या जाए! खैर, आज पेश है तथास्तु में एक और अच्छी कंपनी…औरऔर भी

जो खबर आनी थी, आ चुकी। अब आप हिसाब लगाते हैं कि उसका बाज़ार पर ज़रूरत से ज्यादा असर हुआ है या ज़रूरत से कम। दोनों ही स्थितियों में आप ट्रेडिंग कर सकते हैं। मसलन, ज्यादा गिरा तो वह पलटकर उठ सकता है। वहीं, कम गिरा तो ज्यादा गिर सकता है। यह एक तरह का अनुमान है जिसका सही-गलत होना बाज़ार के पैटर्न व स्वभाव से आपके परिचित होने पर निर्भर करता है। अब शुक्रवार का अभ्यास…औरऔर भी