हमें बाज़ार की तथाकथित ‘गोपनीय’ या ‘गुप्त’ जानकारियों के चक्कर में पड़ना ही नहीं चाहिए। आखिर जिसके पास पूरी नदी हो, उसे कुंओं या बावड़ी में झांकने की क्या ज़रूरत! एक तो ये जानकारियां भरोसा करने लायक नहीं होतीं। दूसरे, इन्हें पूरा निचोड़ लेने के बाद बाहर फेंका जाता है। तीसरे, शेयरों के भाव व उसके पैटर्न में काम की सारी जानकारियां समाहित रहती हैं। उसके बाद का कमाल हमारी बुद्धि करती है। अब शुक्रवार का अभ्यास…औरऔर भी

बैंक व देशी-विदेशी वित्तीय संस्थान पुख्ता इंतज़ाम रखते हैं कि उनकी ट्रेजरी डेस्क को कंपनियों की जो खास अंदरूनी जानकारियां हासिल हैं, वे किसी भी तरह लीक न हों। उनके इस विभाग के किसी भी नए-पुराने कर्मचारी को शेयर बाज़ार में ट्रेडिंग की इजाज़त नहीं होती। मसलन, मेरे एक दोस्त की बेटी आईआईएम से एमबीए करने के बाद जेपी मॉर्गन में कार्यरत है, लेकिन वो ट्रेड या निवेश नहीं कर सकती। अब पकड़ते हैं गुरुवार की दशा-दिशा…औरऔर भी

अंदर की, अघोषित सूचनाओं के आधार पर शेयर बाज़ार में ट्रेडिंग या निवेश करना अपराध है। इसे इनसाइडर ट्रेडिंग कहते हैं। यह अलग बात है कि यह अपराध तय होने में दसियों साल लग जाते हैं। उसके ऊपर भी अपील पर अपील चलती रहती है। रिलायंस इंडस्ट्रीज़ का ताज़ा मामला साल 2007 का है। इसमें बड़े मलाई खाते हैं, जबकि छोटे व रिटेल ट्रेडरों को ‘इनसाइडर’ खबरों के नाम पर फंसाया जाता है। अब बुधवार की बुद्धि…औरऔर भी

वित्तीय बाज़ार की ट्रेडिंग एक तरह का युद्ध है जिसमें आप अपनी चाल से दूसरों के बैंक खाते का धन अपने खाते में खींचते हो। दूसरे को कम समझना या अपने को उस्ताद समझना यहां घातक है। शांत मन, साफ बुद्धि व सटीक विश्लेषण आपके हथियार हैं। सिद्धांतः जो सूचनाएं सबको उपलब्ध हैं, वही आपको भी मिल सकती हैं। अंदर की सूचनाओं पर आधारित इनसाइडर ट्रेडिंग भी चलती है। लेकिन वो अपवाद है। अब मंगलवार की दृष्टि…औरऔर भी