रिस्की बनता बाज़ार हमारे नज़रिए से
आप सुनते-सुनते एकदम पक गए होंगे कि वित्तीय बाज़ार, खासकर शेयर बाज़ार बहुत रिस्की है। हालांकि ज़िंदगी भी बहुत रिस्की है क्योंकि हर अगले पल हम अनिश्चितता की भंवर में छलांग लगाते हैं। लेकिन अपना विचार, नज़रिया व तरीका हम सही कर लें तो ज़िंदगी का रिस्क सहज बन जाता हैं। इसी तरह निरंतर शिक्षा से बाज़ार के प्रति हम अपना बर्ताव सही कर लें तो उसका रिस्क पकड़ में आ जाता है। अब शुक्रवार का अभ्यास…औरऔर भी
ब्रेकआउट में उठाते जाएं स्टॉप लॉस
ब्रेकआउट का सीधा-सा मतलब है कि खरीदनेवाले ज्यादा हैं और बेचनेवाले बहुत कम। मांग सप्लाई से ज्यादा। ऐसे में नहीं पता रहता कि बाज़ार या कोई स्टॉक कहां तक ऊपर जाएगा। कोई लक्ष्य नहीं बांध नहीं सकते कि कहां तक पहुंचे तो निकल जाना चाहिए। इसलिए ऐसे ट्रेड में हमेशा ट्रेलिंग स्टॉप लॉस लगाकर चलना चाहिए। अचानक गिरने पर नहीं तो बड़ा घाटा लग सकता है। भाव जितना बढ़े, स्टॉप लॉस उठाते जाएं। अब गुरु की दशा-दिशा…औरऔर भी
उठते बाज़ार में धनुष से छूटता तीर
ब्रेकआउट ट्रेड तभी होता है जब शेयर का उच्चतम व न्यूनतम भाव पहले से ऊपर जा रहा हो या कम से कम न्यूनतम भाव बराबर उठ रहा हो। पिछले कुछ दिनों के भावों के ऊपरी-नीचे स्तर को मिलाकर रेखा खींचें तो उठता हुआ त्रिभुज बनता है। अमूमन ऐसी स्थिति में आरएसआई 45-50% के आसपास होता है। लेकिन ब्रेकआउट ट्रेड में बढ़ने-गिरने की प्रायिकता लगभग बराबर होती है तो ये काफी रिस्की होते हैं। अब बुधवार की बुद्धि…औरऔर भी
ब्रेकआउट ट्रेड सही कारगर रणनीति
बाज़ार जब बराबर चढ़ रहा हो, अधिकांश शेयर नई ऊंचाइयां छू रहे हों, तब ब्रेकआउट ट्रेड करने का सलीका ही सबसे सही व कारगर रणनीति है। लेकिन ब्रेकआउट ट्रेड के कई तरीके हैं। इनमें से एक है फ्लैग-पैटर्न जिसे हमने कल इस्तेमाल किया। इसके अलावा टेक्निकल एनालिसिस में कुछ अन्य तरीके भी हैं जिन पर हम अगले दिनों चर्चा करेंगे। मगर, इनमें समान पहलू यह है कि ऐसे ट्रेड बड़े रिस्की होते हैं। अब मंगलवार की दृष्टि…औरऔर भी






