क़ासिद के आते-आते खत इक और लिख दूं, मैं जानता हूं जो वो लिखेंगे जवाब में। सायास या अनायास, जो भी मानें, देश में बजट के सालाना अनुष्ठान का आज यही हाल हो गया है। दो दशक पहले तक लोगों को धड़कते दिल से इंतज़ार रहता था कि वित्त मंत्री क्या घोषणाएं करने वाले हैं। इनकम टैक्स में क्या होने जा रहा है। कस्टम व एक्साइज़ ड्यूटी के बारे में जहां आयातकों व निर्यातकों से लेकर छोटी-छोटीऔरऔर भी

अतिविश्वास जीवन के हर क्षेत्र के लिए बुरा है। लेकिन वित्तीय बाज़ार की ट्रेडिंग के लिए तो यह बेहद खतरनाक है। इससे आपमें सुरक्षा का झूठा भाव आ जाता है। गुमान हो जाता है कि बाज़ार पर आपकी राय हमेशा सही बैठती है। इस गफलत में आप अपनी औकात से ज्यादा बड़े सौदे कर बैठते हैं। नतीजतन भयंकर घाटे के शिकार या दिवालिया तक हो जाते हैं। इस अहंकार से बचना ज़रूरी है। अब मंगलवार की दृष्टि…औरऔर भी