दो-चार दिन, चंद हफ्तों या महीनों में शेयरों के भाव डर व लालच से तय होते हैं। इसलिए ट्रेडिंग करनेवालों को इन दो भावनाओं की गहरी समझ हासिल करनी पड़ती है। वहीं, दो-चार या दस-पंद्रह साल में शेयरों के भाव संबंधित कंपनियों के बिजनेस से तय होते हैं। निवेश व ट्रेडिंग की बारीकियां अलग हैं। दोनों में कंपनियां चुनने के आधार अलग हैं। आज तथास्तु में ऐसी कंपनी जिसका अतीत, वर्तमान व भविष्य, तीनों दमदार दिखते हैं…औरऔर भी