छल है कि मैंने तो पहले ही बोला था
2016-08-30
जो भविष्य में होना है, उसको लेकर हम बराबर दुविधा में रहते हैं। यह एकदम स्वाभाविक है। ऊपर से कितना भी बोलें, मगर अंदर-अंदर लगता है कि ऐसा नहीं भी हो सकता। लेकिन जब वही चीज़ हो जाए तो हम कहते हैं कि मैंने तो पहले ही बोला था कि ऐसा होगा। यह एक सहज मनोविज्ञान है जिससे हवाबाज़ी चाहे जितनी कर ली जाए, लेकिन ट्रेडिंग के लिए यह घातक है। अब पकड़ते हैं मंगलवार की दृष्टि…औरऔर भी

