ठहरे दिमाग नहीं, प्रवाह में बनें भाव
2016-08-25
वाकई, शेयरों के भाव हाइज़ेनबर्ग के अनिश्चितता सिद्धांत की तरह बर्ताव करते हैं। इसके मुताबिक, आप किसी अणु की एकदम सटीक स्थिति नहीं माप सकते क्योंकि जिस भी यंत्र या माध्यम से आप उसे नापते हैं, उसका कर्षण बल नापने की प्रक्रिया में उस अणु की स्थिति ही बदल देता है। हाथ लगाओ, डर जाएगी; बाहर निकालो, मर जाएगी। भाव किसी के स्थिर दिमाग में नहीं, बाज़ार के प्रवाह में तय होते हैं। अब गुरु की दशा-दिशा…औरऔर भी

