देश आज़ादी के सत्तरवें साल में प्रवेश कर गया। अब तक के उनहत्तर सालों के अनुभव ने साफ कर दिया है कि हमने बाजार को जितना समझा और बाज़ार शक्तियों को जितना मुक्त किया है, बड़ों से लेकर छोटों तक के विकास के अवसर उतने ही ज्यादा खुले हैं। वहीं, सरकार ने जहां-जहां अपना अंकुश कसा है, वहां-वहां बंटाधार हुआ है। शिक्षा, स्वास्थ्य व सुरक्षा में सरकार की पक्की भूमिका है। बाकी नहीं। अब मंगलवार की दृष्टि…औरऔर भी