नोबेल पुरस्कार जीतने वाले से बड़ा विद्वान कौन होगा? उसने भी अगर शेयर बाज़ार पर रिसर्च कर रखी हो तो कहने ही क्या! लेकिन वे भी ऐलानिया कहते हैं कि छोटी अवधि में शेयरों की चाल को पकड़ना मुमकिन नहीं। इसलिए मानकर चलिए कि सारी गणनाओं के बावजूद हम ट्रेडिंग में काफी हद तक कयासबाज़ी का ही सहारा लेते हैं। ऐसे में गलत दांव पड़ने का जोखिम संभालना बेहद ज़रूरी है। अब पकड़ते हैं गुरु की दशा-दिशा…औरऔर भी