बाज़ार में गुस्सा खुद के लिए घातक
2016-07-18
बाज़ार का हम कुछ बिगाड़ नहीं सकते। लेकिन कोई स्टॉक हमारे माफिक नहीं चलता तो गुस्से में भरकर उसे खरीद या बेच डालते हैं। मेरे गांव के विश्राम सिंह तहसील जा रहे थे मुकदमा लड़ने। साइकिल की चेन बार-बार उतर जा रही थी तो लेट होता जा रहा था। तहसील के पास पुलिया की चढ़ाई पर फिर चेन उतर गई तो मार-लाठी, मार-लाठी साइकिल को ही धुन डाला। मुकदमे की तारीख छूट गई। अब सोमवार का व्योम…औरऔर भी

