यहां फौरन उतरती है झूठ की कलई
2016-07-05
लोकतंत्र में चुनावों का बड़ा महत्व है। लेकिन चुनाव पांच-साला अनुष्ठान हैं तो मतदाता पुरानी बातें भुलाकर नए वादों के जाल में फंस जाता है। सत्तापक्ष को वादे न पूरा करने की भरपूर कीमत ज़रूर चुकानी पड़ती है, लेकिन लोग विपक्ष की कारगुजारियां भूलकर उसके नए वादों के झांसे में पड़ जाते है। मगर, बाज़ार का चक्र हर दिन और सप्ताह का होता है तो यहां झूठ की कलई उतरते देर नहीं लगती। अब मंगलवार की दृष्टि…औरऔर भी

