समाज बुद्धिजीवियों की कितनी भी इज्जत करे। लेकिन समाज व बाज़ार सिद्धांतों या बड़ी-बड़ी बातों से नहीं, बल्कि व्यवहार से चलता है। कुछ समय के लिए बातें अपना असर दिखा सकती है। लेकिन जैसे ही बातों की हकीकत सामने आती है, बाज़ार उसे ही अपना आधार बना लेता है। ब्रिटेन के यूरोपीय संघ से निकलने की बड़ी घटना की असलियत ने बाजार के इस शाश्वत सच को उजागर कर दिया है। अब देखते हैं सोमवार का व्योम…औरऔर भी