वित्तीय बाज़ार बड़ा छलिया है। लगातार पांच-दस दिन अंदाज़ सही बैठता है तो किसी को भी लगने लगता है कि वो तो बाज़ार का मास्टर हो गया। लेकिन अगले ही दिन बाज़ार ऐसा गच्चा देता है कि सारी कमाई एक दिन में स्वाहा हो जाती है। अंदाज़ या गणना का आधार पुराना पैटर्न होता है और पुराना पैटर्न आगे दोहराया जाएगा, इसकी कोई गारंटी नहीं होती। इसलिए बाज़ार में अहंकारी नहीं, विनम्र बनिए। अब गुरु की दशा-दिशा…औरऔर भी