जिस तरह बड़े-बड़े ज्योतिषी तक भविष्य को कभी नहीं बांध सकते, उसी तरह बाज़ार को बांधना किसी के वश की बात नहीं। हम क्या हो सकता है, उसकी प्रायिकता की गणना भर सकते हैं। एनालिस्ट लोगों को बोलने दीजिए कि सेंसेक्स या निफ्टी अगली दीवाली तक कहां जाएगा क्योंकि यही उनका धंधा है। लेकिन हमें तो गांठ बांध लेनी चाहिए कि बाज़ार से पंगा लेना पहाड़ से सिर टकराने जैसा है। अब आजमाते हैं बुधवार की बुद्धि…औरऔर भी