ट्रेडिंग में भेड़चाल नहीं चलती, बल्कि यहां भेड़चाल चलनेवालों का ही शिकार किया जाता है। यहां लंबे समय में बाहरी सलाह या टिप्स का भी खास महत्व नहीं होता। यहां तो व्यक्तिगत करतब और प्रदर्शन ही काम आता है। इनपुट आप दस जगह से ले सकते हैं। लेकिन अंततः आपकी अपनी गणना और अनुशासन ही आपको लाभ दिला सकता है। याद रखें ट्रेडिंग बॉक्सिंग का खेल है, कोई फुटबॉल या हॉकी मैच नहीं। अब बुध की बुद्धि…औरऔर भी

किसी शेयर के बढ़ने या गिरने के पीछे सीधा-सा फंडा यह होता है कि उसमें ठीक उस वक्त खरीदनेवालों का पलड़ा भारी है या बेचनेवालों का। टेक्निकल एनालिसिस के तमाम संकेतकों और कैंडल के पैटर्न से भी हम यही पकड़ने की कोशिश करते हैं। मगर दिक्कत यह है कि सचमुच की खरीद-फरोख्त बने-बनाए पैटर्न में फिट बैठ जाए, यह जरूरी नहीं है। इसलिए ट्रेडिंग में पक्के की नहीं, प्रायिकता की बात चलती है। अब मंगल की दृष्टि…औरऔर भी

हर कोई समान राय का हो जाए तो बाज़ार कभी चलेगा ही नहीं। मैं कुछ सोचता हूं तो आप उससे अलग या उलट सोचें तभी बाज़ार चल सकता है। मैंने सोचा कि बाज़ार बढ़ेगा तो खरीदूंगा। आपने सोचा कि कैसा बौडम है, बाज़ार तो गिरने जा रहा है और आप बेचेंगे। आपकी बिक्री, मेरी खरीद। दोनों से मिलकर सौदा पूरा होगा और बाज़ार चलेगा। इसलिए एक ही समय सभी सही नहीं हो सकते। अब सोमवार का व्योम…औरऔर भी

बाज़ार कभी हमारे हिसाब से नहीं चलता। हमें ही बाज़ार के हिसाब से चलना पड़ता है। तभी हम उससे कमा पाते हैं। हम आगे बढ़कर अनुमान ज़रूर लगाते हैं। लेकिन मानकर चलते हैं कि अनुमान गलत भी हो सकता है। तभी तो स्टॉप-लॉस या पोजिशन साइजिंग के ज़रिए रिस्क को बांधकर चलते हैं। वैसे, लंबे निवेश के लिए अभी मौज का दौर है क्योंकि तमाम मजबूत स्टॉक्स गिरे पड़े हैं। तथास्तु में ऐसी ही एक दमदार कंपनी…औरऔर भी