बाज़ार उतार-चढ़ाव से गुजर रहा है और यह कोई नई बात नहीं क्योंकि लालच व डर की दो अतियों के बीच झूलना उसका मूल स्वभाव है। लेकिन इसके साथ ही हर ट्रेडर के अंदर अलग किस्म का भावनात्मक संघर्ष चलता रहता है। अगर वो उसमें विजय नहीं हासिल कर पाता तो तुक्का भले लग जाए, लेकिन बराबर सफल नहीं हो सकता। इसलिए बाज़ार में जीतने से पहले उसे खुद को जीतना पड़ता है। अब सोमवार का व्योम…औरऔर भी