रिस्क अभी या कभी भी घट सकता है
2015-09-14
ज़िंदगी और बाज़ार का रिस्क हम बखूबी समझते हैं। हमें समझाने की ज़रूरत नहीं। लेकिन साथ ही हम मानकर चलते हैं कि कम से कम हमारे साथ ऐसा नहीं होने जा रहा। दरअसल, यही सबसे बड़ा रिस्क है क्योंकि जब वो हमें दबोचता है तब हमारी कोई तैयारी होती और हम हालात, किस्मत या किसी दूसरे को दोष देकर रोने लगते हैं। बजाय इसके मानकर चलें कि रिस्क कभी भी घट सकता है। अब सोमवार का व्योम…औरऔर भी

