सौदा सही या गलत, फर्क नहीं पड़ता
ट्रेडर का ध्यान किसी और बात के बजाय हमेशा इस पर रहना चाहिए कि वो अपनी पूंजी पर कितना रिटर्न कमा पा रहा है। आपके कितने सौदे सही बैठे और कितने गलत, यह महत्वपूर्ण नहीं। महत्वपूर्ण यह है कि जो सौदे सही बैठे, उनमें आपने कितना कमाया और जो गलत बैठे, उनमें कितना गंवाया। यह मेरा नहीं, बल्कि अब तक के सबसे बड़े ट्रेडर जॉर्ज सोरोस का नीति-वाक्य है। हमेशा इसे याद रखें। अब शुक्रवार का अभ्यास…औरऔर भी
सौदे में 2% से ज्यादा नुकसान घातक
ट्रेडिंग में धन प्रबंधन का एक तरीका पोजिशन साइज़िंग और दूसरा तरीका स्टॉप-लॉस है। स्टॉप-लॉस का स्तर हर शेयर के स्वभाव के हिसाब से तय होता है। वैसे, अगर आप ब्रोकरों या तथाकथित एनालिस्टों की सलाह पर गौर करें तो उनका स्टॉप-लॉस 5-10% तक के नुकसान का होता है। यह उनके फंसाने की चाल है। हमें रिस्क व रिवॉर्ड के आधार पर एक सौदे में 2% से ज्यादा नुकसान कतई नहीं उठाना चाहिए। अब गुरुवार की दशा-दिशा…औरऔर भी
सौदे बीस, एक पर दांव 5% से कम
ट्रेडिंग पद्धति या सिस्टम के अनुशासन के बावजूद बाज़ार का रिस्क समाप्त नहीं होता। बाज़ार की असली चाल कभी भी हमारी गणना को मात दे सकती है। यह जोखिम संभालने के लिए पोजिशन साइजिंग और स्टॉप-लॉस का सहारा लिया जाता है ताकि हमारी ट्रेडिंग पूंजी को आंच न आए। पोजिशन साइजिंग में हम किसी एक सौदे में अपनी 2-5% से ज्यादा पूंजी नहीं डालते ताकि सौदा टूटे भी तो 95% पूंजी सलामत रहे। अब बुध की बुद्धि…औरऔर भी





