हमारे शेयर बाज़ार में देशी या विदेशी संस्थाओं के अलावा ब्रोकरेज हाउसों और पंटरों का भी खूब खेल चलता है। अक्सर ये लोग प्रवर्तकों से मिलकर तूफान मचाते हैं। लेकिन वे बड़ी कंपनियों में खास कुछ नहीं कर पाते। उनका दायरा मिड, स्मॉल या माइक्रो कैप कंपनियों तक सीमित रहता है। इसलिए अक्सर देखने में आता है कि धंधे में पिटी कंपनियों तक के शेयर उछल जाते हैं। हमें उनसे दूर रहना चाहिए। अब गुरुवार की दशा-दिशा…औरऔर भी

वित्तीय बाज़ार में ट्रेडिंग दरअसल एक जंग है जिसमें हम विरोधी का धन निकालकर अपने खाते में खींच लेते हैं। इसलिए यह भलीभांति समझना ज़रूरी है कि हमारे सामने कौन है। यह जानना भी ज़रूरी है कि बाज़ार में असली असर देशी-विदेशी संस्थाओं की हरकतों का पड़ता है। रिटेल ट्रेडर कभी भी बाज़ार की दशादिशा तय नहीं करते। लेकिन हम तो अक्सर अंधेरे में तीर चलाते हैं। लगा तो तीर नहीं तो तुक्का! अब बुधवार की बुद्धि…औरऔर भी

शेयर या किसी भी वित्तीय बाज़ार में ट्रेडिंग के पीछे मूल सोच होनी चाहिए न्यूनतम रिस्क में अधिकतम रिटर्न कमाने की जुगत निकालना। इसीलिए आम ट्रेडरों के लिए सिद्धांत यह है कि जिस दिन भी कोई खबर बड़ी आनेवाली हो, डेरिवेटिव सौदों की एक्सपायरी का दिन हो, कंपनी के नतीजे आने हों, उस दिन ट्रेडिंग कतई ना करें। कारण, इन दिनों खबरों के अंधड़ में भावों में बड़ी उठापटक होती है। अब पकड़ते हैं मंगलवार की दृष्टि…औरऔर भी

इंजीनियरिंग या मेडिकल जैसी किसी भी प्रोफेशनल पढ़ाई में चार-पांच साल लगते हैं। लेकिन वित्तीय बाज़ार की ट्रेडिंग को हम लोग दाएं-बाएं हाथ का खेल समझते हैं, जबकि यह एक साथ साइंस और आर्ट दोनों ही है। इसमें इसके विज्ञान को समझने के साथ ही कला में भी महारत हासिल करनी पड़ती है जिसके लिए काफी अभ्यास की ज़रूरत पड़ती है। फिर, हमें अपने मन व भावनाओं को भी ट्रेन करना पड़ता है। अब सोमवार का व्योम…औरऔर भी

सरकारी बांडों या बैंकों की एफडी में निवेश सुरक्षित माना गया है क्योंकि उनका वास्ता सरकार की नीति, देश की आर्थिक स्थिति, रिजर्व बैंक और मौद्रिक नीति से होता है। हालांकि इनमें से भी रिस्क होता है। पर दुनिया भर में सरकार से जुड़े प्रपत्रों को रिस्क-मुक्त माना जाता है। वहीं, जब हम किसी कंपनी में निवेश करते हैं तो उसका बढ़ना-घटना उसके अपने कामकाज़ से जुडा होता है। आज तथास्तु में पेश है एक सरकारी कंपनी…औरऔर भी