लहलहाती फसल देख मन ललचा जाता है कि काश, ये खेत अपना होता। शानदार बंगला देखकर लगता है कि इसके मालिक होते तो मज़ा आ जाता। लेकिन इनके मालिकाने की एक रत्ती भी पाने की गुंजाइश नहीं होती। वहीं, लिस्टेड कंपनियों के मालिकाने का अंश हम शेयरों के ज़रिए खरीद सकते हैं। लेकिन खरीदें तभी जब मन में आए कि कितनी सॉलिड कंपनी है। काश, हम भी इसके मालिक होते! अब तथास्तु में ऐसी ही एक कंपनी…औरऔर भी

कमोडिटी व शेयर बाज़ार की ट्रेडिंग सिखाने के बहुत सारे क्लासेज़ हैं। 20-25,000 से लेकर दो-ढाई लाख रुपए तक लेते हैं। क्या आपको लगता है कि एक बार इतने खर्च कर दिए तो ट्रेडिंग के उस्ताद बन जाएंगे? अगर हां तो आप एकदम गलत सोचते हैं। सबसे महत्वपूर्ण बात है मूल सूत्रों को समझकर निरंतर अभ्यास करना। अभ्यास में तो इतना दम है कि एकलव्य अर्जुन से भी महान धनुर्धर बन जाता है। अब शुक्रवार का अभ्यास…औरऔर भी

पैसे गंवाने में कोई मेहनत नहीं लगती, बनाने में लगती है। वित्तीय बाज़ार की ट्रेडिंग तो कुछ ज्यादा ही कठिन है। कारण, इसके लिए हमें अपना पूरा माइंटसेट बदलना पड़ता है जो अपने-आप में बेहद मुश्किल काम है। घाटे से हर कोई भागता है। लेकिन ट्रेडिंग करनी है तो दिमाग में बैठाना पड़ेगा कि यहां घाटे से कोई नहीं बच सकता। घाटा इस बिजनेस की लागत है जिसे न्यूनतम रखना सीखना पड़ता है। अब गुरुवार की दशा-दिशा…औरऔर भी

टीसीएस में उम्मीद से बेहतर नतीजों की घोषणा के बाद इशारा मिल गया था कि इन्फोसिस के भी नतीजे बेहतर हो सकते हैं। इसी अनुमान के साथ हमने 16 जुलाई को आकलन किया कि इन्फोसिस 985 से 21 जुलाई को नतीजे आने तक 1080 रुपए तक पहुंच सकता है। और, नतीजों के दिन वो 11.5% उछलकर 1116.35 रुपए पर जा पहुंचा। यह है सोचे-समझे रिस्क और उस पर मिलनेवाले रिवॉर्ड का रिश्ता। अब चलाएं बुध की बुद्धि…औरऔर भी

हमें शेयरों में 2-4% उतार-चढ़ाव पर ट्रेडिंग का काम इंट्रा-डे ट्रेडरों पर छोड़ देना चाहिए और खुद 8-10% लाभ देनेवाले कई दिनों के स्विंग ट्रेड पर फोकस करना चाहिए। हमेशा छह महीने से दो साल के लंबे ट्रेन्ड की दिशा में ट्रेड करें। जिनमें गिरने का ट्रेन्ड मजबूत हो, उन्हें पिछली बढ़त तक पहुंचने पर शॉर्ट करें और बढ़ने के मजबूत ट्रेन्ड वाले स्टॉक्स को पिछली गिरावट के करीब पहुंचने पर खरीद लें। अब मंगलवार की दृष्टि…औरऔर भी