भाव में कंपनी नहीं, भावना का सच
2015-03-13
अमिताभ बच्चन से लेकर सचिन तेंदुलकर तक को भगवान माननेवालों की कमी नहीं। पर हकीकत यही है कि किसी को भी भगवान मानने से अपना भला नहीं होता, भले ही उनकी मार्केटिंग वालों का भला हो जाए। इसी तरह ट्रेडिंग में भावों को भगवान माना जाता है। मगर, वास्तव में भाव कंपनी का सच नहीं, ट्रेडरों की भावनाओं का सच दिखाते हैं। इसीलिए हताशा और उन्माद के पेन्डुलम पर झूलते हैं। अब करते हैं शुक्रवार का अभ्यास…औरऔर भी

