हवा में तीर जुआरी छोड़ते हैं। निवेशक या ट्रेडर हमेशा हिसाब लगाकर चलते हैं कि कोई शेयर कहां तक जा सकता है। आकलन सही हुआ तो कमाते हैं, नहीं तो गंवाते हैं। धुरंधर विश्लेषकों का भी आकलन सही होगा या गलत, यह प्रायिकता पर निर्भर करता है। लेकिन इतना तय है कि बिजनेस अखबारों या चैनलों पर आने वाले भावी आकलन खोखले होते हैं क्योंकि वे रुख को ही बढ़ा-चढ़ाकर पेश करते हैं। अब गुरुवार की दशा-दिशा…औरऔर भी