कोई होलटाइम ट्रेडिंग करे और महीने में 40,000 रुपए (साल के 5 लाख) भी न कमाए तो क्या फायदा! 25% सालाना रिटर्न पकडें तो इसके लिए 20 लाख की पूंजी चाहिए। इसके ऊपर दो साल का बफर, 10 लाख रखना होगा। इसके अलावा इतनी ही रकम बचत खाते में अलग होनी चाहिए। इस तरह ट्रेडिंग से महीने में 40,000 कमाने के लिए कुल चाहिए 40 लाख रुपए। इतने नहीं तो पार्ट-टाइम ही अच्छा। अब शुक्रवार की गति…औरऔर भी

पारंपरिक विवेक कहता है कि अच्छी खबर पर शेयर खरीदो और बुरी खबर पर बेचो। लेकिन कुशल ट्रेडर इसका उल्टा करते हैं क्योंकि उन्हें पता होता है कि खबरों का असर स्थाई नहीं होता। अच्छी खबर पर सभी खरीदने पर उतारू होते हैं जिससे शेयर चढ़ते हैं। कुशल ट्रेडर इस मौके पर मुनाफावसूली करते हैं। वहीं बुरी खबर पर शेयर गिरते हैं तो ट्रेडर इस अवसर का इस्तेमाल पोजिशन बनाने में करते हैं। अब गुरुवार की दशा-दिशा…औरऔर भी

ट्रेडिंग का एक स्टाइल: बहती गंगा में हाथ धोना, यानी हफ्ते-दस दिन के अल्कालिक चक्र में भाव जिस दिशा में चला हो, उसी दिशा में सौदे पकड़कर कमाई करना। लेकिन बीच में घुसने के नाते इसमें कमाई की रेंज कम होती है। दूसरे, रुख पलटा तो चपत का रिस्क तगड़ा रहता है। दूसरा स्टाइल: निश्चित अंतराल पर भाव जहां से रुख पलटते हैं, उस बिंदु को पकड़ना। इसमें रिस्क-रिवॉर्ड अनुपात ज्यादा रहता है। अब बुधवार का व्यवहार…औरऔर भी

अच्छी खबर से उम्मीद बढ़ती है और शेयर के भाव चढ़ जाते हैं। खासकर तब बेचनेवाले लगभग चुक गए हों। लेकिन दिक्कत यह है कि खबर हम से पहले पहुंचवालों तक पहुंच जाती है। लेकिन कभी-कभी ऐसा नहीं हो पाता। जैसे, गुरुवार को सुंद्रम फास्टेनर्स के अच्छे नतीजे आए तो बाज़ार बंद था। हमने इस मौके को पकड़ा। ट्रेडिंग की सलाह दी और वो शेयर शुक्रवार को एक दिन में 17.50% चढ़ गया। अब मंगलवार की नज़र…औरऔर भी

बाज़ार उठता है धीरे-धीरे। लेकिन गिरता है एकदम धूम-धड़ाम। ऐसा इसलिए क्योंकि कोई बुरी खबर आते ही हर कोई ठीक उसी वक्त बेचना चाहता है, बगैर यह सोचे कि उस खबर में सचमुच दम है या वो अफवाह तो नहीं। कालेधन वालों में प्रदीप बर्मन का नाम आया तो हर कोई डाबर बेचने लगा। लेकिन हमने कहा खरीदो, 10-12 दिन में 230 पर होगा। पांचवें ट्रेडिंग सत्र में ही 232 तक पहुंच गया। अब आगाज़ सोमवार का…औरऔर भी