मुंबई नगरिया में मनोज बाजपेयी जैसे हज़ारों कुशल अभिनेता हैं जिनको एक बार काम मिलता है तो महीनों तक सन्नाटा छा जाता है। वित्त के बाज़ार में मंजे हुए ट्रेडर भी ऐसी ऊंच-नीच से बच नहीं पाते। प्रायिकता का पांसा हमेशा आपके पक्ष में बैठे, यह ज़रूरी तो नहीं। इसलिए अभिनेता से लेकर पूर्णकालिक ट्रेडर तक को महीनों के रसद-पानी का इंतज़ाम करके रखना पड़ता है। इस रिस्क को समझ लें कायदे से। अब बुध की बुद्धि…औरऔर भी

ट्रेडिंग से जीविका चलाना आसान नहीं। इसमें तगड़ा अनुशासन चाहिए। सुबह 8 बजे तक तैयार होकर कंप्यूटर पर बैठ जाएं। देखें कि बीती रात हमारे बंद हुए विदेशी बाज़ारों का क्या हाल रहा और आज हमसे पहले खुले एशिया के बाज़ारों की क्या हाल है। फिर, अपने यहां तमाम सूचकांकों का कल क्या हाल रहा। डे-ट्रेडर हैं तो शाम तक बराबर डटे रहना होगा। स्विंग या पोजिशनल ट्रेडर हैं तो बात अलग है। अब मंगल की दशा-दिशा…औरऔर भी

अगर आप ट्रेडिंग से जीविका चलाना ही चाहते हैं तो बड़ी पूंजी के साथ आप को तीन बुनियादी शर्तें पूरी करनी पड़ेंगी। एक, तगड़ा अनुशासन। इसमें समय प्रबंधन सबसे खास है। दो, रिस्क झेलने की भरपूर सामर्थ्य। दिन या हफ्ता छोड़िए, अक्सर सारी तैयारी होने पर भी महीनों तक घाटा उठाना पड़ सकता है। तीन, अकेले काम करने की सुविधा। इन शर्तों को हम अगले कुछ दिनों में खुलकर बताएंगे। तो, करें अब नए हफ्ते का आगाज़…औरऔर भी

हमारे मनाने से कुछ नहीं होता। फिर भी भारत जैसी अर्थव्यवस्था में, जहां बढ़ने की अपार संभावनाएं हों, वहां मनाना चाहिए कि एफआईआई के भागने जैसा कोई छोटा संकट आ जाए ताकि अच्छी कंपनियों के शेयर 20-30% नीचे आ जाएं और हम उन्हें सस्ते में खरीद सकें। खैर, वैसा न भी हो, तब भी हमारे यहां निवेश के बहुतेरे मौके हैं। इन्हीं में खोजकर लाते हैं हम अच्छी कंपनियां। तथास्तु में आज एक ऐसी ही स्मॉलकैप कंपनी…औरऔर भी