हम बैंकों की एफडी, डाकघर बचत, पीपीएफ या लघु बचत योजनाओं में जो भी धन जमा करते हैं, उससे सरकार को सस्ता कर्ज मिल जाता है जिससे वह आमदनी से ज्यादा की गई फिजूलखर्ची या अपने राजकोषीय घाटे को पाटती है। इसी क्रम में उसने किसान विकास पत्र (केवीपी) को फिर से ज़िदा किया है। लेकिन खुद वित्त मंत्री जेटली ने बताया है कि यह करेंसी नोटों जैसा एक बियरर प्रपत्र है जिस पर किसी का नामऔरऔर भी

शेयर या अन्य वित्तीय प्रपत्रों की ट्रेडिंग को हमने भौकाल समझ रखा है, जबकि यह मूलतः किसी दूसरे व्यापार जैसा है। कोई इलेक्ट्रॉनिक सामानों का व्यापार करता है, कोई जनरल स्टोर चलाता है तो कोई सब्जी-भाजी की दुकान करता है। सभी थोक के भाव खरीदकर रिटेल के भाव बेचते हैं। अंतर बस इतना है कि शेयर बाज़ार में थोक बाज़ार अलग से नहीं लगता। हमें थोक भाव खुद पता करना होता है। अब समझें शुक्रवार की ट्रेडिंग…औरऔर भी