घाटा तो मैं छोटा, फायदा तो आप बड़े
दीर्घकालिक निवेश की सलाहों में अगर आपको घाटा लगता है तो इसका आम दोष शेयर बाज़ार में निवेश के अपरिहार्य रिस्क के साथ खास दोष सिर्फ और सिर्फ मेरा है। सारे पक्षों के आकलन में कहीं चूक रह गई होगी। लेकिन अल्पकालिक ट्रेडिंग में अगर फायदा हुआ तो इसका श्रेय सिर्फ और सिर्फ आपका है। यहां मेरी सलाह महज एक इनपुट है। असली फैसला तो आपका होता है जो फायदा कराता है। अब हफ्ते का आखिरी ट्रेड…औरऔर भी
भाव व भावना के लिए चार्ट ही सहारा
शेयरों की चाल को पकड़ने का अचूक उपाय है कि उनके भाव को प्रभावित करनेवाली खबरें आपको सबसे पहले पता चल जाएं। लेकिन ऐसा होने लगे तो बाज़ार का वजूद ही मिट जाएगा। बाज़ार की मूल शर्त है कि यहां मूल्य-संवेदी खबरें हर किसी को समान अवसर और प्लेटफॉर्म पर मिलनी चाहिए। इसकी गारंटी करने के लिए दुनिया भर में इनसाइडर ट्रेडिंग को अपराध माना गया है। ऐसे में चार्ट ही सहारा हैं। अब गुरु की दशा-दिशा…औरऔर भी
भेल गेल सेल, अब सबकी होगी झेल!
आठ मई से नौ जून तक एक महीने के भीतर भेल, बेल, सेल व गेल जैसी तमाम सरकारी कंपनियों के शेयर 20% से लेकर 70% तक बढ़ चुके हैं। स्वाभाविक है कि जिन्होंने इन्हें फूंक मारकर फुलाया, वे मुनाफावसूली तो इनमें करेंगे ही। आम निवेशकों को भी इन्हें बेचकर निकल लेना चाहिए। साथ ही ट्रेडरों को इनमें लॉन्ग नहीं, शॉर्ट करने के मौके ढूंढने चाहिए। गुबार पूरा उतर जाएगा तो मजबूत कंपनियां खिलेंगी। अब बुधवार की बुद्धि…औरऔर भी
उम्मीदों की बाढ़ है, सोचता कोई नहीं
हल्ला है कि मोदी के राज में सरकारी कंपनियां बेहतर काम करेंगी। यही वजह है कि पिछले तीन महीनों में बीएसई सेंसेक्स जहां 12.7% बढ़ा है, वहीं बीएसई पीएसयू सूचकांक 39.7% बढ़ गया। पर क्या सरकारी दखल के हट जाने में वाकई वो चमत्कार है कि सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियां चमकने लगेंगी? सोचिए, क्या सरकारी बैंकों के गले में फंसे 1.64 लाख करोड़ रुपए के डूबत ऋण की समस्या यूं ही सुलझ जाएगी? अब वार मंगल का…औरऔर भी






