इसे लिक्विडिटी कहें या सस्ते विदेशी धन का प्रवाह। इसी ने अमेरिका व जापान समेत दुनिया भर के शेयर बाज़ारों को चढ़ा रखा है। इसका अर्थव्यवस्था की मूल ताकत से खास लेनादेना नहीं। कुल विश्लेषक इसे अमेरिकी केंद्रीय बैंक, फेडरल रिजर्व द्वारा किया गया मैनिप्युलेशन बता रहे हैं। लेकिन शेयर बाज़ार में धनबल के दम पर ऐसी धांधली चलती रहती है। जब सरकारें तक इसमें लगी हों तो इसे कौन रोक सकता है! अब शुक्र की दिशा…औरऔर भी