केवल कंपनियां ही पूंजी व श्रम के सहयोग से अर्थव्यवस्था में मूल्य जोड़ती हैं। बाकी सब व्यापार का चक्र और मुद्रा की फेटमबाज़ी है। इसीलिए कोई बैंक एफडी, यहां तक कि इनफ्लेशन इंडेक्स बांड भी मुद्रास्फीति को नहीं हरा सकते। केवल और केवल कंपनियों के मालिकाने में हिस्सेदारी यानी इक्विटी में निवेश से हम अपनी बचत को मुद्रास्फीति की मार से बचाकर बढ़ा सकते हैं, बशर्ते सही कंपनियां चुनी जाएं। तथास्तु में एक और ऐसी ही कंपनी…औरऔर भी

fun-double

फिल्म या सीरियल में डूबने के बजाय यह देखो कि सामनेवाला कैसी एक्टिंग कर रहा है। तब विलाप करती महिला को देखकर आपकी हंसी छूट जाएगी। रोजमर्रा की ज़िंदगी में यह देखो कि आप कैसी-कैसी हरकतें करते हैं। तब आप खुद पर हंसने लगेंगे और जीने का मज़ा दोगुना हो जाएगा।और भीऔर भी

आप शेयर बाज़ार में अच्छी तरह ट्रेड करना चाहते हैं तो आपको मानव मन को अच्छी तरह समझना पड़ेगा। आखिर बाज़ार में लोग ही तो हैं जो आशा-निराशा, लालच व भय जैसी तमाम मानवीय दुर्बलताओं के पुतले हैं। ये दुर्बलताएं ही किसी ट्रेडर के लिए अच्छे शिकार का जानदार मौका पेश करती हैं। निवेश व ट्रेडिंग के मनोविज्ञान पर यूं तो तमाम किताबें लिखी गई हैं। लेकिन उनके चक्कर में पड़ने के बजाय यही पर्याप्त होगा किऔरऔर भी

मौकापरस्ती अलग है और मौके को पकड़ने के हमेशा तैयार रहना अलग बात है। जिस तरह जीवन में मौके डोरबेल बजाकर नहीं आते, उसी तरह शेयर बाज़ार की ट्रेडिंग में मौके अचानक आपके सामने प्रकट हो जाते हैं। उन्हें पकड़ने के लिए आप तैयार नहीं रहे तो हाथ से निकल जाएंगे। इसके लिए हाथ का खाली रहना ज़रूरी है। अगर आप किसी स्टॉक के प्यार में फंस गए तो समझो गए। अब तलाश आज के मौकों की…औरऔर भी

हमें वही रिस्क उठाना चाहिए जिसे पहले से नापा जा सके, बजाय इसके कि रिस्क उठाने के बाद नापा जाए कि उससे कितनी चपत लग सकती है। किसी सौदे में कितना नफा-नुकसान हो सकता है, इससे बेहतर है यह समझना कि कितना घाटा उठाकर हम कितना फायदा कमा सकते हैं। इसी तरह सफलता का रहस्य मुनाफा कमाने की जुगत में लगे रहने के बजाय घाटे से बचने में है। इन सूत्रों पर कीजिए मनन। बढ़ते हैं आगे…औरऔर भी