जिस फाइनेंस क्षेत्र का काम आम बचत को खींचकर देश के उद्योगीकरण में लगाना है, वह पूरी तरह लोगों को छलने में लगा है। शेयर बाज़ार का छल तो जगजाहिर है। लेकिन खतरनाक बात यह है कि इसमें बीमा से लेकर समूचा बैंकिंग क्षेत्र भी शामिल हो गया है। यहां तक कि सरकारी बीमा कंपनी, भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) के कारिंदे भी किसी से कम नहीं हैं। हो सकता है कि आपको भी हाल में इसऔरऔर भी

जीवन के तमाम क्षेत्रों की तरह शेयर-ट्रेडिंग में भी कुछ नीति-वाक्य चलते हैं। कहते हैं कि इंट्रा-डे ट्रेडर को अगर दिन में लगातार तीन बार घाटा हो तो उस दिन उसे ट्रेडिंग रोक देनी चाहिए। स्विंग ट्रेडर का दांव अगर लगातार तीन दिन उल्टा पड़ जाए तो उसे दो दिन ऑफ ले लेना चाहिए। लेकिन दांव सही पड़ते-पड़ते ट्रेडिंग पूंजी दोगुनी हो जाए तो तीन दिन छुट्टी मनानी चाहिए। अनुशासन के साथ अब बढ़ें बाज़ार की ओर…औरऔर भी