जो लोग अंदर हैं वे जानते हैं। लेकिन जो बाहर हैं उनके लिए शेयर बाज़ार किसी प्रेत-साधक तंत्र विद्या या वशीकरण मंत्र से कम नहीं। उनकी इस रहस्यमयी उत्सुकता ने बॉरेन बफेट, बेंजामिन ग्राहम या वान थार्प की किताबों को बेस्टसेलर बना रखा है। जबकि सच यह है कि समाज की रिस्क कैपिटल को नए उद्यमों तक पहुंचाने का जरिया है शेयर बाज़ार और ट्रेडिंग माहौल बनाने का काम करती है। अब पकड़ते हैं बाज़ार की चाल…औरऔर भी

ऐसा क्यों है कि भारत ही नहीं, दुनिया भर में शेयर बाज़ार के 95% ट्रेडर घाटे में रहते हैं और केवल 5% ही मुनाफा कमाते हैं? इसकी दो वजहें हैं। पहली यह कि ज्यादातर ट्रेडर अपने आगे हर किसी को गधा समझते हैं। दूसरी अहम वजह यह है कि वे टिप्स या टेक्निकल एनालिसिस की गणनाओं पर उछलकूद मचाते हैं। मगर असली कुंजी, धन प्रबंधन के अनुशासन को तवज्जो नहीं देते। चलिए, देखें अब बाज़ार की धूप-छांह…औरऔर भी

तकरीबन सारे के सारे ट्रेडर मानकर चलते हैं कि कंपनी के साथ जो कुछ हो रहा है, वह उसके शेयर के भावों में झलक जाता है। इसलिए अकेले टेक्निकल एनालिसिस से उनका कल्याण हो जाएगा। वे फंडामेंटल एनालिसिस की कतई परवाह नहीं करते। यह एकांगी और नुकसानदेह नजरिया है क्योंकि भाव अंततः जिस मूल्य की तरफ बढ़ते हैं वो कंपनी के फंडामेंटल्स, उसके धंधे की स्थिति से ही तय होता है। अब रुख आज के बाज़ार का…औरऔर भी

हम जितना देख पाते हैं, उतना मानकर चलते हैं। धरती वही। पहले सपाट मानते थे, अब गोल है। मानने को बदल दें तो देखने का फ्रेम/संदर्भ बदल जाता है, तथ्य बदल जाते हैं। मानिए तो शंकर है, कंकर है अन्यथा। यह आस्था की बात है। लेकिन ट्रेडिंग करते वक्त आस्था नहीं, सत्य की दृष्टि काम आती है। जो अपनी धारणाओं से निकलकर जितना सत्य देख पाता है, उतना कामयाब होता है। धारणाओं से ऊपर उठकर देखें बाज़ार…औरऔर भी

जीवन अनिश्चितता से भरा है। किसे पता था कि रुपए को संभालने के लिए उठाए गए रिजर्व बैंक के कदम उल्टे पड़ जाएंगे और शेयर बाज़ार इस कदर टूट जाएगा। ऐसी आकस्मिकताओं के साथ हमें छोटी-छोटी समस्याओं के लिए भी तैयार रहना चाहिए। जैसे, कंप्यूटर ने काम करना बंद कर दिया या नेट कनेक्शन गड़बड़ा गया तो हम क्या करेंगे। मन ही मन इनसे मुकाबले का अभ्यास कर लेना चाहिए। अब आज के बाज़ार की दशा दिशा…औरऔर भी