खराब किस्मत का रोना रोनेवाले अक्सर नाहक मुसीबत मोल लेने और जीत के जबड़े से हार खींच लाने में माहिर होते हैं। ज़रा सोचिए तो सही कि सफलता का बढ़िया ट्रैक-रिकॉर्ड रखनेवाले दिमागदार लोग भी ट्रेड में लगातार पिटते क्यों हैं? क्या यह अज्ञान है, खोटी किस्मत है या अपने ही पैर में कुल्हाड़ी मारने की फितरत? नशेड़ियों की तरह ऐसे लोग खुद को ही खोखला करते चले जाते हैं। खैर, अब रुख करते हैं बाज़ार का…औरऔर भी

sin

वेदांत कहता है कि पाप जैसी कोई चीज़ नहीं। हां, गलती ज़रूर होती है और, हमारी सबसे बड़ी गलती है खुद को कमज़ोर, पापी और दीनहीन, दयनीय समझना। यह समझना कि हम इतने गए-गुजरे हैं कि हमसे कुछ हो ही नहीं सकता।और भीऔर भी