सोने के भाव गिरते जा रहे हैं। डॉलर के मुकाबले रुपया मजबूत हो गया तो सोने के भाव हम भारतीयों के लिए और कम हो जाते हैं। लेकिन सदियों पहले धतूरे से तुलना करने के बावजूद सोने को लेकर हमारा नशा कम होने का नाम ही नहीं ले रहा। प्रसिद्ध मनोविश्लेषक सिगमंड फ्रॉयड ने अपनी किताब ‘ड्रीम्स इन फोकलोर’ में लिखा है कि बेबीलोनिया (अभी का इराक) के प्राचीन मिथकों में सोने को नरक का मल कहाऔरऔर भी

यूनाइटेड बैंक ऑफ इंडिया के नतीजे 14 मई को आए। पता चला कि मार्च 2013 की तिमाही में डूबत ऋणों के चलते उसका शुद्ध लाभ 79.11% घटकर 31.18 करोड़ रुपए पर आ गया। लेकिन उसका शेयर पिछले तीन दिनों में 1.63% बढ़कर कल 59.20 रुपए पर पहुंच गया। भाव कभी झूठ नहीं बोलते। फिर खराब नतीजों से वो गिरे क्यों नहीं? ऐसे सवाल ही शेयर बाजार के बारे में हमारी समझ को बढ़ाएंगे। अब नज़र आज पर…औरऔर भी