घबराए इतना कि दोनों लगे बेचने
2013-03-21
केंद्र सरकार के वजूद पर सच में कहें तो कोई तलवार नहीं लटकी है। फिर भी बाज़ार है कि गिरता ही जा रहा है। बड़े-बड़े निवेशक राजनीतिक अनिश्चितता को लेकर घबरा गए हैं। ऊपर से कॉरपोरेट क्षेत्र भी निराशा जता रहा है। बहुत ही कम मौके ऐसे होते हैं जब एफआईआई (विदेशी निवेशक संस्थाएं) और डीआईआई (घरेलू निवेशक सस्थाएं) एक जैसा बर्ताव करें। लेकिन कल ऐसा ही हुआ। एफआईआई और डीआईआई दोनों ही बिक्री पर उतारू रहे।औरऔर भी

