तंत्र के भीतर तंत्र। सत्ता के समानांतर सत्ता। भारतीय समाज व अर्थतंत्र में ऊपर-ऊपर दिख रही धाराओं के नीचे न जाने कितनी धाराएं बह रही हैं। ये विलुप्त सरस्वती भी हो सकती हैं और घातक कर्मनाशा भी। सहारा समूह ऐसी ही एक अनौपचारिक धारा का नाम है। धंधा तो है लोगों से पैसे जुटाना। लेकिन तरीका आम बैंकिंग से एकदम अलग। धंधे पर कई-कई परतों के परदे। तरह-तरह की बातें। कुछ भी पारदर्शी नहीं। पारदर्शिता के नामऔरऔर भी

जनवरी में देश का औद्योगिक उत्पादन 2.4 फीसदी बढ़ा है। यह उम्मीद से दोगुना है। फिर भी इन आंकड़ों के आने के बाद बाज़ार गिरता गया। कारण, लोगों को लग रहा है कि रिजर्व बैंक शायद अब ब्याज दरों में कटौती न करे क्योंकि कल ही ये आंकड़े भी सामने आए कि रिटेल महंगाई की दर फरवरी में बढ़कर 10.91 फीसदी हो गई है। गुरुवार को थोक महंगाई के आंकड़े आने हैं। वैसे अब भी ज्यादातर जानकारऔरऔर भी