सरकार भले ही एक तोला भी गेहूं नहीं पैदा करती हो, लेकिन लक्ष्य तय करने के उसे कोई नहीं रोक सकता। उसने वर्ष 2011-12 के लिए 840 लाख टन गेहूं के उत्‍पादन का लक्ष्‍य रखा गया है। कृषि राज्य मंत्री हरीश रावत ने मंगलवार को लोकसभा में यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि गेहूं के उत्‍पादन का लक्ष्‍य प्राप्‍त करने और इसकी उत्‍पादकता बढ़ाने के लिए कई फसल विकास कार्यक्रम उनके मंत्रालय की ओर से कार्यान्वित किएऔरऔर भी

देश की बिगड़ती आर्थिक हालत और राजनीतिक टांग-खिंचाई ने वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी को अंदर तक हिलाकर रख दिया है। इतना कि उनका कहना है कि सरकार सुधार लाने के लिए सभी पार्टियों में सर्वसम्मति बनाने की कोशिश करेगी। उन्होंने मंगलवार को राज्यसभा में एक बहस के दौरान कहा कि औद्योगिक उत्पादन में गिरावट आने के बाद सवाल पूछे जा रहे हैं कि क्या भारत की अर्थव्यवस्था पटरी से उतर जाएगी। लेकिन हम में सामर्थ्य है औरऔरऔर भी

भारत में साल 2015 तक खेल के धंधे से हर साल दो अरब डॉलर का राजस्व पाया जा सकता है।  इसमें टेलिविजन मीडिया और प्रायोजन से होने वाली आय की खास भूमिका होगी। यह निष्कर्ष है दुनिया की जानीमानी सलाहकार और एकाउंटिग फर्म प्राइस वॉटरहाउस कूपर्स (पीडब्ल्यूसी) का। पीडब्ल्यूसी के ताजा अध्ययन के मुताबिक आनेवाले सालों में देश में टीवी विज्ञापन और प्रायोजन आय में काफी इजाफा होगा जिससे भारत ब्रिक देशों (रूस, चीन, भारत और ब्राजील)औरऔर भी

पूंजी बाजार नियामक संस्था, सेबी के एक अधिकारी को खूस देकर फर्जी चिट्ठी बनवाने से लेकर मनी लॉन्डरिंग व शेयर बाजार में धांधली करने जैसे अपराधों का दोषी स्टॉक ब्रोकर निर्मल कोटेचा फरार हो गया है। वह भी तब, जब सेबी और रिजर्व बैंक जैसे नियामक ही नहीं आयकर विभाग, प्रवर्तन निदेशालय, आईबी और सीबीआई जैसी एजेंसियां उस पर गिद्ध निगाह रखे हुए थीं। कोटेचा ने तीन साल पहले पिरामिड साइमीरा के शेयरों को जबरन चढाने केऔरऔर भी

बाजार में जबरदस्त चर्चा है कि मंदड़ियों ने कई दिग्गज स्टॉक्स को धूल चटाने की ठान ली है। उनके नए लक्ष्य जानकर आपका माथा चकरा जाएगा। वे इनफोसिस को 699 रुपए, रिलायंस इंडस्ट्रीज (आरआईएल) को 599 रुपए और एसबीआई को 899 रुपए पर पहुंचाने की ठान चुके हैं। जबकि इनफोसिस अभी 1755 रुपए, आरआईएल 745 रुपए और एसबीआई 1790 रुपए के आसपास चल रहा है। इससे आप मंदड़ियों का मंसूबा भांप सकते हैं। इसे भांपकर बहुत सेऔरऔर भी

बाजार इस समय जिस तरह हर दिन धड़ाम-धड़ाम गिर रहा है, उसमें हमारे-आप जैसे निवेशकों के लिए सबसे बेहतर यह होगा कि बिजनेस चैनलों को देखना बंद कर दें, अगले साल-डेढ़ साल के खर्चों के इंतजाम के लिए पर्याप्त धन बैंक एकाउंट में रख दें और इसके बाद वह अतिरिक्त धन अलग कर लें जिसे हम कई सालों के लिए निवेश कर सकते हैं बगैर इस बात की चिंता किए कि रोज़-ब-रोज़ उसमें कितनी घट-बढ़ हो रहीऔरऔर भी

जीवन संविधान से मिला मूल अधिकार है। पर जब हमारे होने, न होने से किसी को कोई फर्क न पड़े तो हम जीते हुए भी मर जाते हैं। अगर आज करोड़ों लोग अप्रासंगिक हैं तो यह तंत्र ही संविधान-विरोधी है।और भीऔर भी