सामाजिक जीवन और प्रकृति में बिंदासपना चलता है। बल्कि सच कहा जाए तो जो रिस्क उठाते हैं, जीवन का असली आनंद वही लोग उठा पाते हैं। महाभारत में कृष्ण यही तो मनोभूति बना रहे होते हैं, जब वे अर्जुन से कहते हैं कि युद्ध में जीत गए तो धरती के सुखों का भोग करोगे और वीरगति को प्राप्त हो गए तो स्वर्ग का आनंद लूटोगे। लेकिन यह मानसिकता शेयर बाजार में नहीं चलती। यहां भावना में आंखऔरऔर भी

जब तक आप इंद्रियों के जाल में फंसे हो, पुरुष स्त्री और स्त्री पुरुष को देखकर खिंचती है, खाने को देखकर लार टपकती है, तब तक आप बन रहे होते हैं, बड़े नहीं होते। वयस्क होने के बावजूद छोटे रहते हो।और भीऔर भी